5 Important Facts About the History and Importance of Makkah

History and Importance of Makkah Part  – 1

बिस्मिल्लाह हिर्ररहमान निर्रहीम, शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा महेरबान और निहायत ही रेहम करने वाला हे।
हम हूजुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़िन्दगी पर आधारित एक पोस्ट लेकर आये हे जिसकी कई किस्ते होंगी, आप सब से गुज़ारिश हे हर एक क़िस्त को एक बार नहीं कम से काम ४ से ५ बार पढ़े ताकि आप सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम की ज़िन्दगी के बारे में सही से इल्म आ जाय, इन्शाह अल्लाह जैसे जैसे आप एक के बाद एक किस्ते पढ़ते जायँगे आपकी आँखों के सामने हुज़ूर हूजुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़िन्दगी के कुछ पहलु आ जायँगे। आप History and Importance of Makkah पढ़ रहे हे।

History and Importance of Makkah
History and Importance of Makkah

आप हूजुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़िन्दगी के बारे में जाने उससे पहले हम उन वाक़्यात पर नज़र डाले जो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की दुनिया में आमद से बहोत पहले हुई। जब मक्का सेहर आबाद नहीं था ना पानी, ना इंसान, न जानवर न कोई परिंदा सिर्फ और सिर्फ गर्म रेगिस्तान था। हमारे लिए ये जानना जरुरी हे की मक्का सेहर कब आबाद हुआ, किसने आबाद किआ कब अल्लाह के घर ”काबा शरीफ ”की तामीर हुई किसने की और ज़मज़म का कुआ कहा से और कैसे जारी हुआ तो आये पहली क़िस्त की शुरुआत करते हे।

History and Importance of Makkah Part 

वीरान रेगिस्तान से आबादी तक।

आज की पोस्ट की शुरआत हम History and Importance of Makkah से करते हे। मक्का सेहर की आबादी काफी पुरानी हे, तक़रीबन ४००० साल पहले मक्का सेहर को हज़रत इब्राहिम अलैहि अस्सलाम की जोज़ा बीबी हाज़रा अलैहि अस्सलाम ने आबाद किआ था। अल्लाह रब्बुल आलमीन के हुक्म से हज़रत इब्राहिम अलैहि अस्सलाम ने अपनी ज़ौजा बीबी हाज़रा अलैहि अस्सलाम और अपने मासूम बेटे हज़रत इस्माइल अलैहि अस्सलाम को कुछ वक़्त की ग़िज़ा और पानी देकर उस वीरान रेगिस्तान में तनहा छोड़कर चले गए।

हजरत इस्माइल अलैहि अस्सलाम भूक और प्यास से तड़प रहे थे , बीबी हाज़रा अलैहि अस्सलाम परेशान होकर इधर से उधर पानी की तलाश में घूम रहे थे, तभी अल्लाह रब्बुल आलमीन ने हज़रत जिब्राइल अलैहि अस्सलाम को वहा भेजा औरअल्लाह के हुक्म से मासुम हज़रत इस्माइल अलैहि अस्सलाम जिस जगह अपने पेर की एडिया रगड़ रहे थे वहां से पानी का एक चस्मा जारी हुआ। यही पानी का चस्मा बाद मे ज़मज़म का पानी के नाम से मशहूर हुआ। अल्लाह रब्बुल आलमीन ने बीबी हाज़रा अलैहि अस्सलाम और हज़रत इस्माइलअलैहि अस्सलाम के लिए पानी का इंतेजाम कर दिया।

History and Importance of Makkah 

कबीला ए जुरहुम का आगमन।

पानी देखकर परिंदो का झुंड वहा आने लगा, उस वक़्त जुरहुम नाम का एक कबीला वहा से गुज़र रहा था, उन्होंने परिंदो के झुंड को आसमान में देखा तो वो समज गए कि यहाँ किसी जगह पर पानी हे और वो क़ाबिले के लोगो ने पानी का चस्मा ढूंढ लिआ और वह आकर बीबी हाज़रा अलैहि अस्सलाम से पानी का इस्तेमाल करने और वहां रहने की इज़ाज़त मांगी। बीबी हाज़रा अलैहि अस्सलाम अकेले थे कोई और नहीं था उनके साथ तो उन्होंने कबीले जुरहुम को वहां रहने की इज़ाज़त दे दी।

History and Importance of Makkah 
History and Importance of Makkah

 

इस तरह बीबी हाज़रा अलैहि अस्सलाम के बाद कबीला ए जुरहुम वहां आकर आबाद हुए, उन्हें देखर दूसरे लोगोने भी वह आकर रहने की शुरुआत की और वो ज़मीन का टुकड़ा जिसे तिहमा कहते थे, एक छोटी बस्ती के रूपमे आबाद होने लगी। बिच बिच में हज़रात इब्राहिम अलैहि अस्सलाम मक्का आकर हज़रत इब्राहिम अलैहि अस्सलाम और बीबी हाज़रा अलैहि अस्सलाम से मुलाकात करते रहते थे वक़्त गुज़रता गया और १५ साल का अरसा बीत गया अब बीबी हाजरा अलैहि अस्सलाम का इस फानी दुनिया से कुच करने का वक़्त आ गया और एक दिन वह इस फानी दुनिया को छोर कर चले गए। हज़रत इस्माइल अलैहि अस्सलाम ने उन्हें ज़मज़म के कुए के नज़दीक दफन किआ।

History and Importance of Makka.

काबातुल्लाह की तामीर।

कुछ वक़्त बाद हज़रत इब्राहिम अलैहि अस्सलाम मुल्क ए शाम से मक्का आये और अपने बेटे हज़रत इस्माइल अलैहि अस्सलाम से मुलाकात की और साथ रहने लगे। तब अल्लाह रब्बुल आलमीन ने हज़रत इब्राहिम अलैहि अस्सलाम को हुक्म दिआ की जो जगह तिहमा के नाम से मशहूर हे वहा उसके घर यानी काबा शरीफ की तामीर की जाय। अल्लाह रब्बुल आलमीन ने हज़रत इब्राहिम अलैहि अस्सलाम को वो जगह बता दी थी जहा पर उसके घर की तामिर की जानी थी। अल्लाह रब्बुल आलमीन के हुक्म से हज़रात इब्राहिम अलैहि अस्सलाम और हज़रात इस्माइल अलय्हि अस्सलाम ने मिलकर काबे को बनाना शुरू किआ और कुछ अरसे बाद काबा मुक़म्मिल बन कर तैयार हो गया।

History and Importance of Makka   

काबा की इबादत की शुरुआत और हज़रत इब्राहीम अलैहि अस्सलाम की तब्लीग।

अल्लाह के हुक्म से वह पर उसकी इबादत शुरू हुई और लोगो ने वहां अल्लाह रब्बुल आलमीन की इबादत शुरू की। हज़रत इब्राहीम ने अपनी पूरी ज़िन्दगी अल्लाह के हुक्म को माना, उसकी इबादत की और लोगो तक अल्लाह का पैगाम पहुंचाया, दिन की तब्लीग करते रहे जब तक ज़िंदा रहे, और उसके बाद हज़रत इब्राहिम अलैहि अस्सलाम का भी दुनिया से रुखसती का वक़्त आ गया, वह भी इस फानी दुनिया को छोड़कर चले गए। हज़रात इब्राहिम अलैहि अस्सलाम के दुनिया से रुखसत हो जाने के बाद भी हज़रात इस्माइल अलैहि अस्सलाम लोगो तक दिन की दावत पहुंचाते रहे एक अल्लाह की इबादत करने को कहते रहे और इस तरह अल्लाह रब्बुल आलमीन का सच्चा दिन वह फैलने लगा।

अल्लाह रब्बुल आलमीन ने लोगो के दिलोमे काबे की इज़्ज़त दाल दी और लोगो के दिलो में काबे की अज़मत घर कर गयी अब लोग काबे को सबसे ज्यादा इज़्ज़त देने और एहतराम करने लगे।

History and Importance of Makka 
History and Importance of Makka

निष्कर्ष।

History and Importance of Makkah की आज की क़िस्त में मक्का मुकर्रमा की तामीर और उसकी शुरुआत के ऐतिहासिक पहलुओं को बयान किया गया है। अल्लाह रब्बुल आलमीन के हुक्म से हजरत इब्राहिम अलैहिअस्सलाम ने उनकी ज़ौजा हज़रत हाजरा अलैहि अस्सलाम और बेटे हजरत इस्माइल अलैहि अस्सलाम की कुर्बानी और सब्र के कारण इस वीरान और बंजर इलाके में जीवन के आसार बने। अल्लाह की मर्जी से यहां पर जमजम का पानी उबल पड़ा, जो इस बस्ती के जीवन का जरिया बना और मक्का आबाद हुआ।

हजरत इब्राहिम अलैहिअस्सलाम और हजरत इस्माइल अलैहिअस्सलाम ने अल्लाह के घर काबा की तामीर की, जिसने इस इलाके को एक पाक और अजमत वाली जगह बनादी। History and Importance of Makkah की अगले पोस्ट में, हम मक्का में बूत परस्ती के इतिहास और इस्लामिक संस्कृति पर इसके गहरे प्रभाव के बारे में बात करेंगे।”

History and Importance of Makkah  की आज की क़िस्त में आपने आप सलल्लाहु अलैहि अलैहि वस्सल्लम की दुनिया की तशरीफ़ आवरी से पहले की कुछ बाते जानी इन्शाह अल्लाह अगले क़िस्त में हम कुछ और बाते जानेंगे की हज़रत इस्माइल अलैहि अस्सलाम की दुनिया से रुखसती के बाद कैसे मक्का में बूत परस्ती शुरू हुई ,किसने की और आगे क्या हुआ तब तक इस पोस्ट को पढ़िए अपने दोस्तों तक शेयर कीजिये ताकि उनलोगो तक ये अनमोल मालूमात पहुंच सके। तब तक मेरे लिए और आलम ए इस्लाम के लिए दुआ कीजिये और पूरी दुनिया में जहा जहा मुसलमानो पर ज़ुल्म हो रहा हे अल्लाह उनकी हिफाज़त फर्मा। अल्लाह हाफिज।

आज, मक्का और काबा न केवल मुस्लिमों के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान बन गया है, जिसकी इज्जत और मोहब्बत लोगों के दिलों में हमेशा कायम रहेगी। History and Importance of Makkah पोस्ट से आप आज का आर्टिकल पढ़ रहे हे ।

FAQ.

Q 1 , किसके एड़िया रगड़ने से ज़मज़म का पानी निकला ?
A 2 , हज़रात इस्माइल अलैहि अस्सलाम के एडिया रगड़ने से ज़मज़म का पानी निकला।

Q 2, सबसे पहले कोनसा क़बीला मक्का में आबाद हुआ ?
A 2 , सबसे पहले जुरहुम कबीला मक्का में आबाद हुआ।

Q 3, जिस जगह पर जुरहुम कबीला आबाद हुआ उस जगह को क्या कहते थे ?
A 3 , जिस जगह पर जुरहुम कबीला आबाद हुआ उस जगह को तिहामा कहते थे।

Q 4 , बीबी हाज़रा अलैहि अस्सलाम को कहा दफनाया गया ?
A 4 , बीबी हाज़रा अलैहि अस्सलाम को ज़मज़म के कुए के नज़दीक दफनाया गया।

Q 5 , किसके हुक्म से हज़रात इब्राहिम अलैहि अस्सलाम ने काबा की तामीर की ?
A 5 , अल्लाह रब्बुल आलमीन के हुक्म से हज़रात इब्राहिम अलैहि अस्सलाम ने काबा की तामीर की।

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